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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ऊपर आरोप लगते रहे हैं कि वो उद्योगपतियों को फायदा पहुँचाते हैं। मोदी सरकार ने अपने करीबी उद्योगपति गौतम अडानी को पिछले दिनों देश के 6 बड़े एयरपोर्ट को चलाने की जिम्मेदारी सौप दी थी।

अब नए खुलासे में यह सामने आया है कि केंद्र सरकार ने बिना किसी राज्य और जनता से पूछे बगैर ही ये एयरपोर्ट अडानी समूह को सौप दिए! अब तक एयरपोर्ट ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (AAI) इन एयरपोर्ट का प्रबंधन संभालती थी।

यह जानकारी राज्यसभा की समिति ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को हाल ही में दी है। इसपर सवाल उठ रहे हैं कि मोदी सरकार ने एयरपोर्ट का प्रबंधन अडानी समूह को सौपने से पहले राज्यों से क्यों नहीं पूछा? मोदी सरकार पर पहले से ही आरोप लगते रहे हैं कि वो सरकारी संपत्तियों को निजी हाथों में दे रही है।

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टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, “मंत्रालय ने इस संबंध से जुड़ी रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें कहा गया है कि एयरपोर्ट को लीज पर देने से पहले राज्यों से नहीं पूछा गया है। सरकार ने 6 एयरपोर्ट को लीज पर देने के लिए बाकायदा बोली लगाई गई थी, इस बोली में एकतरफा अडानी ग्रुप ने जीत हासिल की थी। जो एयरपोर्ट अडानी के खाते में आए हैं वो जयपुर, अहमदाबाद, लखनऊ, मेंगलुरु, त्रिवेंद्रम और गुवाहाटी हैं।

हालाँकि, सरकार ने निजीकरण का पक्ष लेते हुए कहा है कि वो पीपीपी मॉडल (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) के अंतर्गत इन एयरपोर्ट को विकसित करना चाहती है।

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नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने यह माना कि उसने एयरपोर्ट को लीज पर देने से पहले राज्य सरकारों या फिर जनता से नहीं पूछा गया है। बता दें कि पीपीपी मॉडल में कोई सरकारी संपत्ति निजी हाथों में देने से पहले राज्य और जनता से पूछन होता है।

अडानी के झोली में आने वाले ये एयरपोर्ट्स अब अडानी ग्रुप के पास अगले 50 साल तक होंगे। यानि इन एयरपोर्ट को इनको कैसे चलाना है, रख-रखाव कैसे करना है इसका अधिकार अडानी ग्रुप के पास होगा।