जम्मू कश्मीर के कठुआ में आठ साल की एक मासूम बच्ची से बलात्कार और हत्या मामले में पठानकोट की एक विशेष अदालत ने सोमवार को छह लोगों को दोषी करार दिया है। जिनमें से तीन को उम्रकैद और तीन को 5-5 साल की सजा सुनाई गई है।

वहीं पठानकोट की अदालत ने सुनवाई करते हुए अपने फैसले में मुख्य आरोपी संझीराम के बेटे और सातवें आरोपी विशाल को बरी कर दिया। जबकि छह लोगों को दोषी करार दिया है।

आरोप पत्र के मुताबिक पिछले साल 10 जनवरी 2018 को अगवा की गई आठ साल की बच्ची को कठुआ जिले के एक मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया था और उससे सामूहिक बलात्कार किया गया था। यही नहीं बच्ची को मारने से पहले उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया था। जिस तरह से इस घटना को अंजाम दिया गया था इसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। घटना के विरोध में लोग सड़कों पर आ गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को सात मई 2018 को कठुआ से पंजाब के पठानकोट स्थानांतरित कर दिया था। क्योंकि जम्मू कश्मीर सरकार और कुछ वकीलों ने कठुआ में निष्पक्ष सुनवाई नहीं होने की आशंका प्रकटते हुए उसे स्थानांतरित करने की मांग की थी।

जिन लोगों को दोषी ठराया गया है उनके नाम- संझीराम जो की मुख्य आरोपी है, एएसआई आनंद दत्ता, ग्राम प्रधान परवेश कुमार, एसपीओ दीपक खजूरिया, एसपीओ सुरेन्द्र वर्मा, हेड कांस्टेबल तिलक राज हैं। बता दें कि कठुआ में 8 साल की बच्ची को पहले किडनैप किया गया फिर उसका बलात्कार और फिर मासूम की हत्या कर दी थी।

साल 2018 जनवरी महीने में जब कुठआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल समुदाय की लड़की अपने घोड़ों को चराने गई थी और वापस नहीं लौटी जिसके बाद बच्ची घर तो लौटी मगर बेजान यानी मरी हुई।