मंगलवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के ‘स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स’ में अपना व्याख्यान देते हुए कहा- पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रघुराम राजन का दौर बैंकों के लिए सबसे खराब रहा है।

उन्होंने यह भी कहा, ‘रघुराम राजन ही उस वक्त आरबीआई के गवर्नर थे, जब महज राजनेताओं के एक फोन कॉल पर सरकारी बैंकों से लोन दिए गए और उसकी सजा ये बैंक आज तक भुगत रहे हैं।’

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के इस बयान पर अब पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता राजीव शुक्ला ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा है कि मोदी सरकार को अब 6 साल हो गए हैं। वित्त मंत्री जी को अब मनमोहन जी को गाली देने के बजाय अपनी सरकार के काम के बारे में सोचना चाहिए। 

निर्मला बोलीं- मनमोहन और राजन ने बैंकों को किया बर्बाद, इसबार ‘नेहरू’ को नहीं ठहराया जिम्मेदार

उन्होंने कहा कि जब मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे तब देश में आर्थिक सुधार हुए। उनके कार्यकाल में हर सेक्टर में तरक्की थी, लोगों के लिए नौकरियां थी। ऐसे में विदेश में जाकर उनकी इस तरह आलोचना ठीक नहीं।

खराब अर्थव्यवस्था के दौर में भी कई बार भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने और संवारने की पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कोशिश किसी से छिपी हुई नहीं है। इसलिए भी उन पर उंगली उठाना, वो भी एक वित्त मंत्री द्वारा, जो वर्तमान में आर्थिक हालात की बदहाली के लिए जिम्मेदार है, हैरान करने वाला वाकया है।

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में तमाम सेक्टर से खबरें आने लगी कि वहां पर ताले लगने शुरू हो गए हैं और बेरोजगारी के सारे रिकॉर्ड पहले ही तोड़ चुकी मोदी सरकार ने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही अर्थव्यवस्था की बदहाली के तमाम रिकॉर्ड तोड़ दिए।

ऐसे हालात में बुरी परिस्थितियों से निपटने के लिए उपायों पर चर्चा करने के बजाय जब देश की वित्त मंत्री पुरानी सरकारों और पुराने आरबीआई गवर्नर पर ठीकरा फोड़कर बच रही हैं तो समझा जा सकता है कि देश की अर्थव्यवस्था का भविष्य कितने अंधकार में है।