कई संघियों की सेलेक्टिव शर्म जागी है, उन्हें संविधानवाद याद आया है और वे आईपीएस करकरे पर प्रज्ञा की बकवास को इस मायने में जस्टिफाई करना चाहते हैं कि उसके साथ हिरासत में अच्छा व्यवहार नहीं हुआ।

वे आतंकी प्रज्ञा सिंह की पुलिस हिरासत में हुई यातना का विरोध करना चाहते हैं। हम इस वाली बात का स्वागत करते हैं। प्रज्ञा सिंह भले ही आतंकी हो उसके मानवाधिकारों का पूरा सम्मान होना चाहिए था ठीक वैसे ही जैसे किसी भी आरोपी के साथ होना चाहिए।

उम्मीद है हिरासत में प्रज्ञा सिंह के साथ बलात्कार नहीं हुआ है, सोनी सोरी के साथ हुआ। प्रज्ञा सिंह को वैसी अमानवीय यातनाएं नहीं दी गईं जैसी सोनी सोरी को दी गईं। प्रज्ञा सिंह के गुप्तांगों में पत्थर नहीं ठूंसे गए जैसा सोनी सोरी के साथ किया गया। और भी ऐसी अमानवीय यातनाएं जिनका उल्लेख सम्भव नहीं। जमानत मिलने के बाद भी प्रज्ञा सिंह सुरक्षित ही घूम रही है उसपर किसी तरह का हमला, एसिड अटैक नहीं हुआ- सोनी सोरी पर हुआ।

जब सोनी सोरी के साथ हुई इन यातनाओं की जानकारी पब्लिक स्फीयर में आई तो उन संघियों की प्रतिक्रिया क्या थी जो अब मानते हैं कि आतंकी प्रज्ञा सिंह के साथ मानवीय व्यवहार होना चाहिए था? वे मानते थे कि सोनी सोरी चूंकि विकास के नाम पर आदिवासियों को उजाड़ने के रास्ते का रोड़ा हैं इसलिए उनके साथ यह सब करने वाले पुलिस कर्मी देशभक्त हैं- ये यातनाएं, ये बलात्कार देशभक्त बलात्कार थे।

हम ऐसा नहीं मानते- न आतंकी प्रज्ञा सिंह के साथ, न सोनी सोरी या साईं बाबा के साथ। देश संविधान से चलना चाहिए, सरकारों को चाहिए देश को संविधान से चलने दें। न एक्टिविस्टों को आतंकी घोषित करें न आतंकियों को मसीहा घोषित कर उन्हें संसद भेजने की कोशिश करें। यातना, बलात्कार अमानवीय व्यवहार किसी के साथ न हो।

विजेंदर मसिजीवी की फेसबुक वाल से साभार