भाजपा-आरएसएस ने कभी भी सावरकर और गोलवलकर के नाम पर वोट नही माँगा लेकिन उनकी विचारधारा को बढ़ाने का काम लगातार करते रहे।

हम (समाजवादी) लोहिया-आंबेडकर के नाम पर वोट माँग रहे थे लेकिन उनकी विचारधारा लोगो में किस तरह स्थापित हो इसकी कोई कार्य योजना नही थी।

गाँव के ज़्यादातर लोग गोलवलकर और सावरकर को नही जानते फिर भी लोग उनकी विचारधारा से ग्रसित हैं। इधर आंबेडकर-लोहिया को ज़्यादातर लोग जानते हैं लेकिन उनकी विचारधारा से अपरिचित हैं।

हम जिस भी विचारधारा पर चल रहे हों, उसे स्थापित करने के लिये हमें कार्य योजना की ज़रूरत है।