जब नरेंद्र मोदी से सवाल पूछने का मौका मिला तो एंकरों ने उनके पूछा- आप थकते क्यों नहीं, कौन सा टॉनिक लेते हैं, जेब मे बटुआ रखते हैं क्या, खाना बनाना जानते हैं या नहीं, रात में कितनी देर सोते हैं, आप इतने हंसमुख क्यों हैं, सिनेमा देखते हैं या नहीं आदि.

और वही एंकर नर्स और डॉक्टरों से पूछ रहे हैं अस्पतालों में बेड कम क्यों हैं. दवाओं की सप्लाई क्यों नहीं आ रही है, एनसेफेलाइटिस से निबटने की रणनीति क्यों नहीं है!

पत्रकारिता की मृत्यु हो चुकी है. आप चाहें को दो मिनट का मौन रख सकते हैं.

पत्रकारिता आईसीयू में गई है. अपना इलाज कराने. अपने लिए विश्वसनीयता हासिल करने. वह विश्वसनीयता, जो उसने लोकसभा चुनाव में बेच खाई थी.

लोकसभा चुनाव के दौरान चैनलों की विश्वसनीयता शून्य हो चुकी है. सब मोदी के लिए सात सुर में गा रहे थे.

अब बिना विश्वसनीयता के पत्रकारिता का धंधा भी नहीं हो सकता. विपक्ष के ज्यादातर दल बहसों में आ नहीं रहे हैं. जनता बहस देख नहीं रही है.

धंधा करना है तो विश्वसनीयता चाहिए. इसलिए पत्रकारिता आईसीयू में गई है. अपना इलाज कराने. अपने लिए विश्वसनीयता हासिल करने.

  • दिलीप मंडल