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नरेंद्र मोदी 2014 में इस देश की जीडीपी को डबल डिजिट का करने यानि 10% पर ले जाने और फिर से भारत को सोने की चिड़िया बनाने के वादे पर सत्ता में आए थे। लेकिन उनके कार्यकाल में देश के पास जो था वो भी जाता दिख रहा है।

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के बुनियादी क्षेत्र यानि इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में निवेश 10 साल में सबसे ज़्यादा गिर गया है। ये बात भारत की एकमात्र सर्वप्रथम क्रेडिट रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी एक रिपोर्ट में बताई है।

क्रिसिल देश की मानिजानी रेटिंग एजेंसी है। इसकी स्थापना 1987 में की गई थी। पहले इसे क्रेडिट रेटिंग इंफॉर्मेशन सर्विस ऑफ इंडिया लिमिटेड के नाम से जाना जाता था। इसकी रेटिंग और रिपोर्ट निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बुनियादी क्षेत्र में खर्च वर्ष 2008-2012 के दौरान रहे जीडीपी के 7 फीसदी से फिसलकर वर्ष 2013-17 के दौरान 5.8 फीसदी के करीब रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि निजी निवेश को तेजी से नहीं बढ़ाया गया तो इसमें और कमी आ सकती है।

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वर्ष 2013 से 2017 तक एक साल को निकाल दिया जाए तो मोदी सरकार का कार्यकाल ही बचता है। जहाँ वर्ष 2008-2012 मतलब यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान जीडीपी का 7 फीसदी हिस्सा बुनियादी क्षेत्र के निवेश पर खर्च हो रहा था वहीं, वर्ष 2013 से 2017 के दौरान ये निवेश जीडीपी का 5.8 फीसदी का रह गया है।

यही नहीं 2018 तक आते आते हालत ये हो गई है कि ये निवेश 10 साल के सबसे निचले स्तर पर चला गया है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, 2008 में सालाना जीडीपी का 37% हिस्सा बुनियादी क्षेत्र में जा रहा था वहीं, ये 2018 में घटकर 25% रह गया है।

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