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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बैलेट पेपर से हुए छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की हार और पिछले दिनों दिल्ली विश्वविद्यालय में ईवीएम से हुए छात्रसंघ चुनाव में एबीवीपी की जीत के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं।

ईवीएम से जगह जगह हो रही भारतीय जनता पार्टी की जीत के बाद अब आरएसएस(RSS) की छात्र इकाई एबीवीपी की जीत पर सवाल उठ रहे हैं।

चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल पर एबीवीपी की जीत और बैलेट पेपर से होने वाले चुनाव में एबीवीपी की हार के चलते लोग इसपर सवाल उठा रहे है।

आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता विकास योगी ने ट्विटर पर लिखा कि ‘पंजाब यूनिवर्सिटी में बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तो एबीवीपी हारी, राजस्थान यूनिवर्सिटी में बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तो एबीवीपी हारी, फिर दिल्ली यूनिवर्सिटी में ईवीएम से चुनाव हुआ तो एबीवीपी जीत गई और अब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में बैलेट पेपर से चुनाव हुआ तो एबीवीपी फिर हारी।’

सिर्फ राजनीति ही नहीं, अन्य क्षेत्र के लोग और आम जनता भी इसपर सवाल उठाते दिख रहे हैं।

बॉलीवुड के गायक और म्यूज़िक निर्माता विशाल दादलानी ने ट्विटर के जरिए इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी है।

ईवीएम से एबीवीपी की जीत और बैलेट से हार पर उन्होंने लिखा है- ‘यही कारण है कि 2019 चुनाव में ईवीएम को बैलेट पेपर से नहीं बदला जाएगा।’

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव के नतीजों के बाद आम जनता भी इसपर सवाल उठाते दिख रही है ।

एक सोशल मीडिया यूज़र ने लिखा कि ‘डूसू चुनाव में ईवीएम इस्तेमाल हुई तो बीजेपी सभी सीट जीती और जेएनयूएसयू चुनाव में बैलेट पेपर तो बीजेपी सभी सीटों पर हारी।’

वहीं RSS की ओर इशारा करते हुए धर्मवीर यादव लिखते हैं- “चड्ढी गैंग की जान ईवीएम में बसती है। ईवीएम हटा दो, इनकी जान निकल जाएगी”। जिसके साथ इन्होने बैन ईवीएम का हैशटैग भी इस्तेमाल किया है।

हालाँकि JNU में हमेशा से लेफ्ट का दबदबा रहा है इसलिए वहां ABVP की हार पर हैरानी नहीं होनी चाहिए, मगर EVM होता तो कुछ खेल करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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