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राफेल विमान खरीद में हुए भ्रष्टाचार पर सरकार की मुश्किलें अब और बढ़ सकती हैं। फ्रांस में आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ने वाले एक एनजीओ ने इस मामले के खिलाफ फ्रांस में शिकायत दर्ज करा दी है।

फ्रेंच वेबसाइट मीडियापार्ट के अनुसार फ्रेंच एनजीओ शेरपा ने यह शिकायत अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में दर्ज कराई थी।

इस शिकायत में पूछा गया है कि ‘2016 में दासो एविएशन द्वारा बनाए 36 लड़ाकू विमान भारत को देने का सौदा किन शर्तों पर हुआ’ और ‘भारतीय साझीदार के बतौर रिलायंस को क्यों चुना गया।

मीडियापार्ट की खबर के अनुसार शेरपा के संस्थापक विलियम बोर्डों ने कहा है कि, ‘हर बात इशारा करती है कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। नेशनल फाइनेंशियल परक्वे (फ्रांस में कानूनी प्रशासन में आपराधिक मामले देखने वाले अधिकारी) को जो तथ्य बताए गए हैं, उनके आधार पर जल्द से जल्द जांच शुरू होनी चाहिए।

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भारत में भी राफेल विमान खरीद में हुए भ्रष्टाचार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। भारत में याचिकार्ताओं की प्रमुख मांग इस विवादित डील को रद्द कर डील में हुए भ्रष्टाचार की जांच कराने की है।

इस मामले में अधिवक्ता विनीत ढांडा, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह समेत पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिंहा, अरूण शौरी और अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने भी एक संयुक्त याचिका दायर की है। शुरुआती दलील अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा रख रहे हैं।

मनोहर लाल शर्मा ने न्यायालय में अपील की है कि यह समझौता अवैध है तथा इसकी जांच होनी चाहिए। साथ ही शर्मा ने इसी बात को लेकर कोर्ट से अपील की है कि इस मसले पर पांच जजों वाली बेंच सुनवाई करे।

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आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह के वकील ने कोर्ट में राफेल विमान की कीमतों पर सरकार के पक्ष का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि 36 राफेल विमानों की डील की कीमतों का खुलासा दो बार संसद में किया जा चुका है।

इसलिए सरकार कीमतों से जुड़े आंकड़ों को जनता के बीच सार्वजनिक नहीं करने का तर्क स्वीकार करने योग्य नहीं है।

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