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पूरा एक महीना गुज़र गया, लेकिन मेघालय के एक खदान में फंसे मजदूरों को अब तक निकाला नहीं जा सका है। सरकारे सोई हैं… विश्वगुरू भारत ख़ामोश है… टीवी चैनल रोज़ राम मंदिर बनवा रहे हैं।

पर किसी को अंदर इतनी हिम्मत नहीं है कि इतना शोर मचाए कि सरकारें नींद से जाग जाएँ और मजबूर हो जाए मज़दरों की ज़िंदगियाँ बचाने के लिए।

हालांकि कई बचाव टीमें मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स के अवैध खदान में एक महीने से फंसे मज़दूरों को निकालने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही हैं। लेकिन ये अनुशासन इसलिए बना हुआ है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए ये आदेश दिया है कि खदान में फंसे मज़दूरों को ज़िंदा या मुर्दा निकाला जाए।

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आज 14 जनवरी को पूरा एक महीना बीत चुका है, पर हालात जस के तस हैं। उन मज़दूरों की अब तक कोई सुध नहीं है। कोई नहीं जानता कि वो ज़िंदा हैं भी या नहीं!… हालांकि अधिकारिक तौर पर अभी कुछ कहा नहीं गया है।

सारे ग़ैरज़िम्मेदार नेता निहायत ही ज़िम्मेदारी से कहने में कोई गुरेज़ नहीं कर रहे हैं कि- “हम उन्हें निकाल लेंगे”

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बचाव टीम में भारतीय नौसेना, एनडीआरएफ़, जीपीआर, आरओवी, एनजीआईआर, सीएसआईआर, कोल इंडिया, किर्लोस्कर ब्रदर्स लि. समेत कई टीमें शामिल हैं। बावजूद इसके मज़दूरों को खदान से निकाला नहीं जा सका है।

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