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कांग्रेस के ‘चौकीदार चोर है’ के जवाब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कैंपेन शुरू किया है। सोशल मीडिया पर यह कैंपेन खासा चर्चा में है। पीएम मोदी के इस कैंपेन को आम लोगों से लेकर पत्रकारों तक का समर्थन मिल रहा है।

देश के कई जाने माने पत्रकार मैं भी चौकीदार हैशटैग के साथ ट्वीट करते दिखाई दे रहे हैं। इनमें से कुछ ट्वीट्स को पीएम मोदी ने खुद अपने अकाउंट से रीट्वीट भी किया है।

एबीपी न्यूज़ के पत्रकार विकास भदौरिया ने भी मैं भी चौकीदार हैशटैग के साथ ट्वीट करते हुए लिखा है कि ‘पत्रकार भी चौकीदार है’। जिसे पीएम मोदी ने रीट्वीट भी किया है।

पीएम मोदी ने लिखा, “बिल्कुल हैं। प्रेस और पत्रकार लोकतंत्र को मजबूत करते हैं। मीडिया हमारी लोकतांत्रिक भावना को मजबूत बनाता है। वे निडर होकर महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने लाते हैं और जन जागरूकता बढ़ाते हैं”।

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पीएम मोदी भले ही उनके कैंपेन का समर्थन करने के लिए पत्रकारों की तारीफ करते हुए उन्हें लोकतंत्र को मज़बूत बनाने वाला बता रहे हों। लेकिन हक़ीक़त यह है कि उसी लोकतंत्र की मज़बूती के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पांच साल के कार्यकाल में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेस नहीं की है। वह रवीश कुमार जैसे निष्पक्ष पत्रकारों की चुनौती के बावजूद उनका सामना करने से बचते नज़र आए हैं।

इसी को लेकर बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पीएम मोदी पर तंज़ कसा है। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “माननीय प्रधानमंत्री जी, अगर देश के PM स्वतंत्र पत्रकारों और प्रेस से संवाद नहीं करेंगे तो लोकतंत्र कैसे मज़बूत होगा? अधिकांश निरपेक्ष पत्रकारों की शिकायत है कि आपने विगत 5 वर्षों में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर स्वतंत्र सवालो का सामना ही नहीं किया है। उनकी शिकायत दूर होनी चाहिए”।

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