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ज़ी न्यूज के एडिटर इन चीफ और पकौड़ा रोजगार को आर्थिक नीति में जगह देने वाले पीएम मोदी के सहयोगी सुधीर चौधरी एक बार फिर पकड़े गए हैं। हालांकि इस बार वाला मामला वैसा नहीं है जिसकी वजह से उन्हें फिर तिहाड़ जेल जाना पड़े।

दरअसल सुधीर चौधरी एक बार फिर सत्ता की गोदी में साक्षात पाए गए हैं। और सत्ता की गोदी में बैठना उस तरह की दलाली नहीं है जिसमें तिहाड़ जेल जाना पड़े। उल्टा इसके लिए सुधीर चौधरी सत्ताधीशों द्वारा कई तरह प्रोत्साहित भी किए जा सकते हैं।

मामला ये है कि 26 फरवरी को सुधीर चौधरी ने एक ऐसा ट्वीट किया जिसे कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना पर तंज समझा जा रहा है। सुधीर चौधरी ने लिखा है ‘1975 में आयी फ़िल्म दीवार में नायक अमिताभ बच्चन का मशहूर dialogue था- मैं आज भी फैंके हुए पैसे नहीं उठाता। तब बेरोज़गारी और ग़रीबी अपने चरम पर थी लेकिन Angry Young Man ख़ैरात नहीं लेता था। लेकिन आज के दौर में लोग नेताओं द्वारा बाँटी जा रही ख़ैरात ख़ुशी से स्वीकार कर रहें हैं।’

पहली बात तो ये कि इस डायलॉग को पर्दे पर बोला भले ही अमिताभ बच्चन ने हो लेकिन लिखा जावेद अख़्तर साहब ने था। अगर सुधीर चौधरी को जावेद अख्तर लिखा इतना ही पसंद आ रहा है तो वो आज भी बहुत कुछ लिख और बोल रहे हैं। खुल मंचों से मोदी सरकार और उसकी नीतियों की कड़ी आलोचना करते हैं। क्या सुधीर चौधरी कभी उन आलोचनाओं को भी अपने किसी ट्वीट में शामिल करेंगे? जाहिर है नहीं करेंगे, क्योंकि ऐसा करने पर गोदी से उतार दिए जाएंगे।

ख़ैर मूल मुद्दें पर लौटते हैं। सुधीर चौधरी ने अपने ट्वीट में कहीं भी कांग्रेस का जिक्र नहीं किया है। लेकिन साफ पता चल रहा है कि वो हाल ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा किए गए वादे ‘न्यूनतम आय योजना’ पर तंज कस रहे हैं। और योजना को खैरात बता रहे हैं।

कांग्रेस ने वादा किया है कि अगर वो सत्ता में आए तो 20% गरीब परिवारों को हर साल 72,000 मिलेंगे। यह योजना महिला केंद्रित है इसलिए पैसा सीधे गृहिणियों के खाते में जमा किया जाएगा। यानी कांग्रेस प्रति माह 6000 रु गरीब परिवार को देने का वादा कर रही है। और इस वादे को बिना किसी तर्क और तथ्य के सुधीर चौधरी खैरात बता रहे हैं।
ट्वीट में कांग्रेस को लेकर उनकी राजनीतिक दुर्भावना साफ झलक रही है। और ये दुर्भावना क्यों इसका कारण भी सब जानते हैं।

अब दिलचस्प बात ये है कि जो सुधीर चौधरी आज कांग्रेस के 6000 रु प्रति महीना को खैरात बता रहे हैं, वही सुधीर चौधरी बीजेपी के 6000 रु प्रति साल को किसानों के सबसे बड़े कल्याण से जोड़कर दिखा चुके हैं।

गौरतलब है कि मोदी सरकार का अंतरिम बजट को पेश करते हुए वित्त मंत्री ने किसानों के लिए 6,000 रुपये प्रति वर्ष की घोषणा की थी। ये रकम प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 2 हेक्टेयर या उससे कम जोत वाले जमीन के किसानों को दिए जाने की बात कही गई थी। वित्त मंत्री बताया था कि इस योजना से 12 करोड़ किसानों को फायदा मिलेगा।

सुधीर चौधरी ने इस योजना पर ट्वीट करते हुए लिखा था ‘जय जवान, जय किसान, जय आम इंसान #BUDGT2019’

दलाली को परिभाषित करने के लिए इससे उच्छा उदाहरण और क्या होगा? गजब की बात है कि सुधीर चौधरी को 6000 रु महीना खैरात लग रहा है और 6000 रु प्रति वर्ष ‘जय किसान’

2014 में तो पीएम मोदी ने 15 लाख अकाउंट में डालने का वादा किया था। उसके बार में सुधीर चौधरी आज तक नहीं बोलें, क्यों? मीडिया का काम सत्त की आलोचना करना है लेकिन गोदी पत्रकार तो विपक्ष की ही आलोचना करते रहते हैं। बात कांग्रेस-बीजेपी की नहीं है, बात पत्रकारिता के बुनियानी उद्देश्य का है।

Alt news के को-फाउंडर प्रतीक सिन्हा ने सुधीर चौधरी की इन दोनों ट्वीट्स का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है
‘जब मोदी सरकार ने 2 हेक्टेयर से कम भूमि वाले किसानों के लिए 6,000 रुपये प्रति वर्ष समर्थन की घोषणा की थी तब सुधीर चौधरी ने ‘जय किसान’ के नारे के साथ जोरदार स्वागत किया था। जब राहुल गांधी ने न्यूनतम आय योजना का वादा किया, तो सुधीर चौधरी ने व्यंग्य किया और इसे “खैरात” करार दिया।’