2 साल पहले जिस पहलू खान की भीड़हत्या का वीडियो पूरे देश ने देखा, उसी किसान की भीड़ हत्या मामले में आज अलवर की अदालत ने ये कहकर छह आरोपियों को बरी कर दिया कि उसके पास पर्याप्त साक्ष्य नहीं है।

एक तरफ देश स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, दूसरी तरफ स्वतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आज इस तरह की खबर लोगों को हैरान और परेशान कर रही है कि ऐसी भीड़हत्या जिसको सबने अपनी आंखों से देखा, उसमें भी अगर आरोपी को छोड़ दिया जाएगा तो इस देश में न्याय किसे मिलेगा।

फैसला आने के बाद तमाम लोग अपनी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं ।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष मोहित पांडेय लिखते हैं- कल स्वतंत्रता दिवस है और आज फैसला आया है । पहलू खान को किसी ने नहीं मारा था लाल किले से चढ़कर बड़ी-बड़ी बातें करने वालों ने स्वतंत्रता के मूल्यों (न्याय, लोकतंत्र ) को नीचे उतार के फेंक दिया है।

इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लिखा- किसी की सरेआम हत्या के साक्षात प्रमाण होते हुए भी सब आरोपियों की मुक्ति ? लोकतंत्र से शोकतंत्र की ओर..!