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मोदी सरकार ने बड़े ही धूम-धाम से महत्वाकांक्षी योजना मुद्रा लोन की शुरुआत की थी। मगर अब ये अर्थव्यवस्था के लिए ख़तरा साबित होता जा रहा है। जिसे लेकर रिज़र्व बैंक ने मोदी सरकार को चेतवानी दी है। RBI ने कहा है कि 11,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुके ‘बैड लोन्स’ एनपीए की अगली वजह बन सकते हैं।

दरअसल साल 2015 में मोदी सरकार ने देश में छोटे कारोबारियों की मदद के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना लॉन्च किया था। इस योजना के तहत सरकार ने गैर-कृषि और जीविका चलाने वाले कामों के तहत लोगों को आसान ब्याज दर पर लोन देने का फैसला किया था।

ये योजना अब बैंकों के लिए ख़तरा बनता जा रही है। रिजर्व बैंक ने बताया कि साल 2017-2018 में आई प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2018 में इस स्कीम के तहत कुल 2.46 ट्रिलियन रुपये खर्च हुए है।

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स्कीम के तहत दिए गए कुल कर्ज में 40 प्रतिशत अदायगी महिला उद्यमियों को, जबकि 33 प्रतिशत सोशल कैटिगरी में की गई। वित्तीय वर्ष 2017-2018 के दौरान प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत 4.81 करोड़ से ज्यादा रुपये का फायदा छोटे कर्जदारों को पहुंचाया गया।

RBI ने मंत्रालय को चेतावनी दी है कि मुद्रा लोन एनपीए का अगला बड़ा कारण बन सकता है, जिसने बैंकिंग सिस्टम को पूरी तरह से हिला दिया है।

गौरतलब हो कि 2015 में शुरू हुई यह योजना, तीन कैटिगरीज में दिया जाता है। लोन प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 8 अप्रैल, 2015 को हुई थी। इस स्कीम के तहत, बैंक छोटे उद्यमियों को 10 लाख रुपये तक का लोन दे सकते हैं।

लोन को तीन कैटिगरीज़ में बांटा गया है- ‘शिशु’ कैटिगरी में 50,000 रुपये, ‘किशोर’ कैटिगरी में 50,001 रुपये से 5 लाख रुपये और ‘तरुण’ कैटिगरी में 5,00,001 रुपये से 10 लाख रुपये तक का लोन दिया जाता है।

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‘तरुण लोन’ के तहत सरकार ने 5-10 लाख के लोन दिए। हैरानी वाली बात ये भी है कि मोदी सरकार इस योजना को एक उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन अब एनपीए की बढ़ती समस्या ने मोदी सरकार और खासकर की सरकारी बैंकों की चिंता जरुर बढ़ायी होगी।

क्योंकि पहले से ही घोटालों की मार झेल रहे कई सरकारी बैंक इस योजना से पैसे वापस नहीं आना उनकी मुसीबत दोगुनी कर सकते है, साथ ही पब्लिक सेक्टर बैंक के अलावा कई प्राइवेट बैंक भी मुद्रा योजना के तहत लोन की सुविधा देते हैं।