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नरेंद्र मोदी ने केंद्र की सत्ता में आने से पहले देश से अच्छे दिन का वादा किया था। वह अपने इस वादे को पूरा करने में कितना कामयाब हुए इसका अंदाज़ा संयुक्त राष्ट्र संघ की ताज़ा रिपोर्ट से लगाया जा सकता है।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, खुशहाली के मामले में भारत साल दर साल पीछे खिसकता जा रहा है। इस साल भारत  सात पायदान पीछे खिसक कर 140वें स्थान पर पहुंच गया है। पिछले साल भारत इस सूची में 133वें स्थान पर था। फिनलैंड लगातार दूसरे साल भी इस मामले में पहले स्थान पर रहा, जबकि युद्धग्रस्त दक्षिण सूडान को इस सूची में आखिरी स्थान मिला है।

खास बात यह है कि खुशहाली के मामले में भारत दुनिया के 156 देशों की इस सूची में अपने पड़ौसी देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश और चीन से भी पीछे है। इस सूची में पाकिस्तान 67वें, बांग्लादेश 125वें और चीन 93वें नंबर पर है।

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संयुक्त राष्ट्र की खुशहाली लिस्ट 6 कारकों (आय, स्वस्थ जीवन की उम्मीद, सामाजिक सपोर्ट, आजादी, विश्वास और उदारता) के आधार पर तय की जाती है। संयुक्त राष्ट्र की सातवीं सालाना वर्ल्ड हैपीनेस रिपोर्ट में इस बात पर भी गौर किया गया है कि लोगों के बीच चिंता, उदासी और गुस्से सहित नकारात्मक भावनाओं में बढ़ोतरी हुई है।

इस रिपोर्ट में पाया गया है कि खुशहाली के मामले में भारत की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। 2018 में भारत इस मामले में 133 वें स्थान पर था, जबकि 2017 में भारत की स्थिति ज्यादा अच्छी थी। वह पिछले साल 155 देशों में 122वें स्थान पर था। इससे पूर्व वर्ष 2016 में वह 118वें स्थान पर था।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्ष ने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधना शुरु कर दिया है। कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने ट्वीट कर लिखा, “मोदी के शासनकाल में 159 देशों की वर्ल्ड हैप्पीनेस इंडेक्स में भारत की रैंक:

2013 – रैंक 111

2016 – रैंक 118

2017 – रैंक 122

2018 – रैंक 133

2019 – रैंक 140

देश की ख़ुशियाँ भी चुराई इस चौकीदार ने!”