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सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और सीबीआई के तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ जाँच कर रही सीवीसी की अगुवाई करने वाले जस्टिस एके पटनायक ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि,

“आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के कोई सबूत नहीं हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कमेटी ने वर्मा को हटाने में बेहद जल्दबाज़ी दिखाई”

साथ ही जस्टिस पटनायक ने ये भी कहा है कि सीवीसी की जिस रिपोर्ट को आधार बनाकर पीएम की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने आलोक वर्मा को हटाया है उस रिपोर्ट के निष्कर्ष मेरे नहीं है।

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सीवीसी चौधरी ने आलोक वर्मा से कहा था अस्थाना से दूर रहो-

सीबीआई विवाद में बड़ा ख़ुलासा हुआ है।  क़रीब ढाई महीने पहले जब मोदी सरकार ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेज दिया था, तो उसके एक दिन पहले सीवीसी केवी चौधरी आलोक वर्मा से मिले थे।

उन्होंने वर्मा से कहा था कि वो, “राकेश अस्थाना को अकेला छोड़ दें” ज़ाहिर है कि राकेश अस्थाना सीबीआई में नं. दो की हैसियत रखते हैं और वो मोदी सरकार के बेहद क़रीबी माने जाते हैं।

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वरिष्ठ पत्रकार स्वाति चतुर्वेदी ने भी ट्वीटर पर लिखा हैं कि, “तत्कालीन सीबीआई चीफ़ आलोक को मोदी सरकार द्वारा जबरन छुट्टी पर भेजने से एक दिन पहले केंद्रीय सतर्कता आयुक्त चौधरी आलोक वर्मा से मिले थे। उन्होंने आलोक वर्मा से अस्थाना को अकेला छोड़ देने की बात कही थी।“

ग़ौरतलब है कि सीवीसी के रिपोर्ट के बाद ही 10 जनवरी को पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली हाई पावर कमेटी ने आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटाकर फ़ायर और होमगार्ड विभाग का निदेशक बना दिया था।