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सोशल मीडिया, अखबार, टीवी चैनल पर करोड़ों रुपए का विज्ञापन करने के बाद अब नरेंद्र मोदी के खुद का चैनल लॉन्च हो गया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 26 मार्च को नमो (नरेंद्र मोदी) टीवी चैनल लॉन्च हुआ। हालांकि नमो टीवी बहुत पहले ऑन्लाइन नमो ऐप पर मौजूद था। लेकिन लंबे टेस्ट रन के बाद अब टीवी पर भी शुरू हो चुका है।

वीडियोकॉन और डिश टीवी पर नमो टीवी का प्रसारण जारी है। आने वाले समय में दूसरे चैनलों पर दिखाया जा सकता है। यह चैनल बिल्कुल फ्री हैं यानी इसे देखने के लिए आपको रिचार्ज करवाने की जरूरत पड़ेगी।

बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री इस चैनल के माध्यम से अपनी बात जनता तक पहुंचाएंगे। अब सवाल ये उठता है कि जब देश लगभग सभी मीडिया संस्थान सत्ता की गोदी में बैठकर सिर्फ और सिर्फ उनकी बात जनता तक पहुंचा रहे हैं तो इस नए टीवी चैनल की क्या जरूरत थी?

पूरा कार्यकाल तो प्रधानमंत्री मोदी ने रैलियों में ही बिता दिए अब ऐसी कौन सी बात रह गई है जो जनता को बताना है? और बताने लायक किया क्या जो बताने के लिए बेकाबू हुए जा रहे हैं? 2014 के घोषणा पत्र का एक भी बातो तो पूरा हुआ नहीं है। वादे के मुताबिक, किसी को हर साल दो करोड़ रोजगार मिले नहीं, गंगा साफ हुआ नहीं, स्मार्ट सीटी बना नहीं… तो फिर बताना क्या है? पांच साल में दंगा, लिंचिंग यही सब बढ़ा है क्या इसका प्रचार करना चाहते हैं मोदी?

अगर ये करना है तो सोशल मीडिया और टीवी-अखबार के गोदी पत्रकार हैं ही। सोशल मीडिया पर बीजेपी किसी भी अन्य पार्टी के मुकाबले ज्यादा प्रभावशाली है। इसकी क्या जरूरत थी।

इससे भी जरूरी बात ये है कि लोकसभा चुनाव से ठीक आचारा सहिंता लागू होने के बाद इस चैनल को क्यों लॉन्च किया गया? जब तक ये चैनल ऑनलाइन था तो इसपर मोदी की स्कीम्स और पुराने व नए भाषणों का प्रसारण होता था, अब तो चुनाव होने वाला है स्कीम्स लॉन्च होगा नहीं। और जहां तक भाषण की बात है तो मोदी मीडिया के चैनल अनकट लाइव दिखते ही हैं।

क्या चुनाव आयोग को इस लॉन्चिंग से कोई दिक्कत नहीं है? क्या आचारा सहिंता लागू होने के बाद इस तरह का चैनल लॉन्च किया जा सकता है, इसके बारे में चुनाव आयोग को बताना चाहिए।

पत्रकार अभिसार शर्मा ने इस चैनल के प्रसारण का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए चुनाव आयोग को अपने ट्वीट में टैग किया है।

अभिसार ने लिखा है ‘आचार सहिंता लागू होने के बाद नोमो टीवी वीडियोकॉन और डिश टीवी पर लॉन्च हो चुका है। क्या सच में चुनाव आयोग भाजपा द्वारा किए गए उल्लंघनों से चिंतित है। ऐसा नहीं है कि भाजपा को खुद को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष चैनल की आवश्यकता है’