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पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सुन्दरलाल अस्पताल में इंसानियत और देशभक्ति को पैरों तले रौंध दिया गया। जब पुलवामा हमले में शहीद हुए अवधेश यादव की कैंसर पीड़िता की माँ मालती देवी को दवा और जांच के लिए भटकना पड़ा। हैरान करने वाली बात ये भी है कि इससे पहले ऐलान करते हुए आदेश किया गया था कि शहीद के माता-पिता का इलाज निशुक्ल किया जाये।

दरअसल हिंदी अख़बार दैनिक जागरण की ख़बर अनुसार, पुलवामा में शहीद हुए जवान की माँ मालती देवी जब कैंसर के इलाज के लिए वाराणसी के अस्पताल पहुंची तो उन्हें दवा और जांच करने के लिए भटकना पड़ा। इसपर आहत मालती देवी ने कहा कि जिसके बेटे ने देश लिए जान दी हो वो बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान में उसी माँ के लिए किसी को हमदर्दी नहीं है।

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उन्होंने कहा कि मैं बार बार खुद से ये पूछती हूँ क्या मेरे बेटे की शहादत का कोई मोल नहीं रह गया है। उन्होंने सवाल किया कि हमारी सरकार अपने देश के शहीदों के परिवार के साथ ऐसा ही रवैया अपनाती रहेगी?

उन्होंने कहा कि मुझे अब भी पहले की तरह कीमोथेरेपी के लिए बीएचयू आना पड़ता है, दो दिन इंतजार के बाद इलाज मिलता है। लंबी लाइन में लगने के बाद एक काउंटर से दूसरे काउंटर का चक्कर लगाते लगाते मन दुखी हो जाता है।

हालाकिं इससे पहले चंदौली जिले के बहादुरपुर गांव के शहीद सीआरपीफ जवान अवधेश यादव की पत्नी शिल्पी यादव को मुख्यमंत्री योगी ने लखनऊ आवास पर बुलाकर उन्हें चंदौली जिले में कनिष्ठ लिपिक पद पर नियुक्ति पत्र दिया था। मगर शहीद की माँ इलाज के लिए आज भी दर दर की ठोकरे खा रही है।

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इन्हें पूछने वाला न कोई देशभक्त सामने आ रहा है और न ही कोई बीजेपी के बड़े नेता जो पुलवामा हमला के बाद जंग की बात करने लगे थे। असल जंग तो शहीद की माँ लड़ रही है पहली कैंसर से और दूसरी जंग ऐसे सिस्टम से लड़ रही है, जिनके पुलवामा हमला लोकप्रियता की बढ़ाने का मौका था। जिससे लोगों के अंदर देशभक्ति जगे और लोग एक बार फिर शहीद की माँ के इलाज जैसे अहम मुद्दों भूल देशभक्ति का झंडा बुलंद करने में लग जाये।