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मोदी सरकार ONGC की मुंबई हाई तथा वसई ईस्ट जैसे नौ बड़े तेल एवं गैस फील्डों को बेचना चाहती थी। लेकिन विरोध के बाद अब इस योजना पर विराम लग गया है।

समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी है कि नीति आयोग निजी और विदेशी कंपनियों को बेचना चाहती थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों के पुराने पड़ चुके फील्डों से उत्पादन बढ़ाने के उपाय तलाशने को लेकर समिति गठित की थी।

पिछले साल नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार की अध्यक्षता मे समिति बनाई गई। मुंबई हाई के पश्चिमी अपतटीय तेल एवं गैस फील्डों, हीरा, डी-1, वसई ईस्ट और पन्ना के साथ असम में ग्रेटर जोराजन तथा गेलेकी फील्ड, राजस्थान में बाघेवाला और गुजरात में कलोल फील्ड को निजी या विदेशी कंपनियों को बेचने पर विचार किया गया था।

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नीति आयोग तथा सरकार के सूत्रों ने कहा कि ONGC के साथ-साथ सरकार के भीतर ही कुछ तबकों ने इस योजना का पुरजोर विरोध किया। ये क्षेत्र मौजूदा तेल एवं गैस उत्पादन में 95 प्रतिशत का योगदान देते हैं। फिलहाल इन्हें निजी या विदेशी कंपनियों के हवाले नहीं किया जाएगा।

इन नौ फील्डों के अलावा 49 अन्य छोटे क्षेत्रों को भी नीलाम किया जाना था। इन फील्डों का कुल उत्पादन में करीब 5 प्रतिशत योगदान है।

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ONGC का कहना था कि उसने पिछले चार दशकों तक मेहनत तथा अरबों डालर निवेश कर जो खोज और विकास की है। उसे निजी/विदेशी कंपनियों को थाली में सजाकर नहीं दे सकती। वहीं सरकार में कुछ लोग इस से सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि इससे उत्पादन की संभावनाएं बढ़ेंगी।