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18 अप्रैल को देश की जनता 13 राज्यों की 97 लोक सभा सीटों पर अपना वोट डालेगी. उत्तर प्रदेश की हाथरस सीट इन्हीं में से एक है जिसपर कल मतदान होने वाला है. हाथरस में 1967 से अब तक कुल 13 लोक सभा चुनावों के लिए वोट पड़ चुके हैं. इसमें से 6 चुनावों में भाजपा ने अपनी जीत दर्ज कराई है. इसके बावजूद ये सीट चुनावी लड़ाई के मामले से दिलचस्प रहेगी.

अखिलेश की रैली

9 अप्रैल को सपा ने हाथरस में रैली की थी. इस रैली में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा था कि भाजपा के लोगों को रात में नींद नहीं आ रही है. उन्होनें स्टेज से जनता को सम्बोधित करते हुए कहा कि, “महागठबंधन माहामिलावट नहीं है. बल्कि महागठबंधन महापरिवर्तन की आवाज़ दे रहा है.” उन्होनें मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है.

अखिलेश यादव ने ये भी कहा कि मोदी सरकार ने अपना 2014 का संकल्प पत्र पूरा नहीं किया था. इस हिसाब से वो 2019 का संकल्प पत्र भी पूरा नहीं करेगी और इसलिए ये पत्र ‘धोके का पत्र’ है. इसी के साथ-साथ अखिलेश ने नरेंद्र मोदी के नॅशनलिस्म वाले एजेंडा पर भी तीखे सवाल करे. उन्होनें कहा कि देश को बुलेट ट्रैन कि ज़रूरत नहीं है बल्कि जवानों को बुलेट प्रूफ जैकेट्स की ज़रूरत है. उनके हिसाब से भाजपा सरकार के आने के बाद जवानों पर हमले और ज़्यादा बढ़ गए हैं.

हाथरस, भाजपा और महागठबंधन

2019 के चुनावों के लिए अपनी नया पार लगाने के लिए सपा, बसपा और रालोद ने एक दूसरे का हाथ थामा है. महागठबंधन का असर इतना है कि पुरे देश का चुनाव उत्तर प्रदेश की इन पार्टियों के मेल के आस-पास घूम रहा है. लेकिन हाथरस सीट के चुनाव में इस महागठबंधन को भाजपा के प्रत्याशी राजवीर सिंह बाल्मीकि (दिलेर) हैं. ये ध्यान देने वाली बात है कि हाथरस लोक सभा सीट अनुसूचित जाती के लिए रिजर्व्ड है. यानी हर पार्टी इस सीट से केवल अनुसूचित जाति का प्रत्याशी ही उतार सकती है.

2014 के चुनाव में यहाँ से भाजपा के राजेश कुमार दिवाकर ने 544277 वोटों से जीत दर्ज कराई थी. साथ ही में बसपा प्रत्याशी मनोज कुमार सोनी को 217891 वोट, सपा प्रत्याशी रामजी लाल सुमन को 180891 और रालोद प्रत्याशी को 86109 वोट मिले थे. अगर सपा, बसपा और रालोद के 2014 के वोट मिला दिए जाएं तो इन्हें 2014 में कुल मिलकर 484891 वोट हो जाते हैं. ये अब भी भाजपा से कम है. लेकिन 2019 के वोट पैटर्न को सिर्फ पिछले चुनाव से नहीं आँका जा सकता है . इस बार महागठबंधन के ओर से हाथरस से सपा के नेता रामजी लाल सुमन चुनाव लड़ेंगे.

लेकिन ये चुनाव इसलिए एक तरफ़ा नहीं रहेगा क्यूंकि महागठबंधन होने के कारण वोटों पर असर पड़ेगा. साथ ही में क्यूंकि ये सीट sc के लिए रिजर्व्ड है, भाजपा से ज़्यादा महागठबंधन की पार्टियों की इस वर्ग के लोगों में लोकप्रियता है. यहाँ तक कि 2009 के चुनाव में इस सीट पर रालोद का प्रत्याशी ही जीता था. और पिछले कई चुनावों से इस सीट पर बसपा पार्टी का ही प्रत्याशी दूसरे पायदान पर रहा है.

इसपर सवाल ज़रूर उठाया जा सकता है कि जब बसपा नेता पिछले साल ही नहीं बल्कि कईं सालों से इस सीट पर मज़बूत पकड़ बनाये हुए हैं तो उन्हें महागठबंधन की ओर से टिकट क्यों नहीं मिला.

खैर, इस सीट पर कल जो चुनाव होने वाला है वो महागठबंधन और भाजपा के बीच होगा. अब देखने वाली बात ये है कि सपा-बसपा-रालोद का गठबंधन इस बार जीत दर्ज करवा पता है या दोबारा भाजपा ही बाज़ी मार ले जाएगी.