ग्लोबल फर्म गोल्डमैन सैश ने कहा है कि वर्तमान में आर्थिक मंदी 2008 की आर्थिक मंदी से भी ज्यादा खतरनाक है। उन्होंने कहा है कि ये आर्थिक मंदी जनवरी 2018 से अभी तक जारी है, लगभग 20 महीने तक लगातार मंदी के जारी रहने का मतलब है कि ये बेहद खतरनाक है।

इस ग्लोबल फर्म ने कहा है कि निवेश और निर्यात लंबे समय से घट रहा है लेकिन खपत में तेज गिरावट चिंता का कारण बना हुआ है। इसलिए यह आर्थिक संकट नोटबंदी या 2008 के वित्तीय संकट से अलग और ज्यादा खतरनाक है क्योंकि वो परिस्थितियां अस्थाई थी लेकिन यह तो लग रहा है स्थाई होती जा रही है।

गोल्डमैन सैश की वॉल स्ट्रीट में मुख्य अर्थशास्त्री प्राची मिश्रा ने एक कार्यक्रम में कहा कि ‘अब वृद्धि के आंकड़े लगभग 2% नीचे आ गए हैं’।

साथ ही कहा कि निवेश और निर्यात लंबे समय से घट रहे हैं लेकिन खपत में इतनी तेजी से गिरावट चिंता का विषय है।

2019-20 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर को ना सिर्फ आरबीआई ने घटाकर कम कर दिया है बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी एजेंसियों ने भी विकास दर को कम करके आंका है। भले ही आर्थिक मंदी के सारे रिकॉर्ड टूट रहे हैं लेकिन मोदी सरकार के मंत्री अभी भी उल जलूल बयानों में व्यस्त हैं।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जहां पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और रघुराम राजन पर ठीकरा फोड़ रही हैं वहीं पर रेल मंत्री पीयूष गोयल नोबेल पुरस्कर अभिजीत बनर्जी पर तंज कस रहे हैं और उनकी इस उपलब्धि को सिर्फ इसलिए खारिज कर रहे हैं क्योंकि वह वामपंथी रुझान के हैं।