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ख़ुद को दलितों का हितैशी बताने वाली भारतीय जनता पार्टी (BJP) में दलित नेताओं को किस कदर नज़ंरअंदाज़ कर उनका अपमान किया जाता है, इसकी बानगी हरियाणा के पलवल में देखने को मिली।

यहां डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जंयती के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में पूर्व विधायक और दलित नेता राम रतन को बोलने का मौका नहीं दिया गया। अपने ही क्षेत्र में मंच पर बोलने का मौका न दिए जाने से दलित नेता ने ख़ुद को अपमानित महसूस किया और वह मंच पर ही फूट-फूट कर रोने लगे।

राम रतन के रोने का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जिसमें वह गले में पड़े बीजेपी के पटके से बार-बार आंसू पोंछते नज़र आ रहे हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि राम रतन उस वक्त रो रहे हैं, जब सीएम मनोहर लाल खट्टर अपना भाषण दे रहे हैं।

दरअसल पलवल के औरंगाबाद गांव में आयोजित ये सभा राम रतन के क्षेत्र में ही आयोजित कराई गई थी। उन्हें उम्मीद थी कि इस सभा में उन्हें भी अपने लोगों को संबोधित करने का मौका मिलेगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। मुख्यमंत्री के भाषण के बाद उन्हें मंच पर बोलने का मौका नहीं दिया गया, जिससे आहत होकर वह फूट-फूट कर रोने लगे।

सभा के बाद जब पत्रकारों ने दलित नेता राम रतन से उनके रोने के बारे में पूछा तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें सभा में बोलने का मौका नहीं दिया गया, जिसे उन्होंने ख़ुद का अपमान समझा।

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हालांकि इस मामले पर सफाई देते हुए सीएम ने कहा, ‘प्रोटोकॉल के अनुसार समय कम होने के चलते रामरतन जी का नंबर नहीं आया, लेकिन मैंने खुद उनके बारे में मंच से बहुत कुछ कह दिया था, रामरतन पार्टी के सच्चे सिपाही हैं।

वहीं कांग्रेस ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने दलित नेता का रोने वाला वीडियो ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा, “बाबा साहेब की जयंती पर खट्टर साहेब द्वारा एक दलित विधायक का घोर अपमान भाजपा की दलित विरोधी मानसिकता को दर्शाता है। पहले श्री बिशंबर बाल्मीकी, विधायक को 15 अगस्त, 2017 को अपमानित किया गया, फिर श्रीमती संतोष सारवाँन पर हमला और अब ये”।