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ऐसा सिर्फ भारत में हो सकता है की जिस ‘लोकपाल’ पर सरकार चली गई उस नए लोकपाल की नियुक्ति सरकार बनाने के पांच साल बाद की जा रही है। वो भी जब तब चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली बेंच ने ही सरकार को 15 दिन के अंदर लोकपाल का नाम तय करने को कहा। अब नए लोकपाल का सामने आ गया है सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज पिनाकी चंद्र घोष होंगें।

अन्ना आंदोलन से सुर्ख़ियों में आया लोकपाल अब एक फिर से खबरों में है। क्योंकि पीएम नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई,लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन और मशहूर वकील मुकुल रोहतगी की सेलेक्शन कमेटी ने घोष के नाम पर मुहर लगा दी है। अब ऐसे मामले में जब आपसी सहमति से जब सबकुछ तय कर दिया गया तो सवाल उठना लाज़मी है आखिर पिनाकी चंद्र घोष है कौन?

याद हो जस्टिस घोष की उस खंडपीठ का हिस्सा जो बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में साजिश रचने के आरोप में 2017 में बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी,उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी और कल्याण सिंह के खिलाफ ट्रायल कोर्ट को आरोप दर्ज करने को कहा था। इस खंडपीठ में उनके साथ जस्टिस आर एफ नरीमन थे।

इसके अलावा उनकी ही बेंच ने तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता और उनकी सहेली शशिकला के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में मुकदमा चलाने का फैसला दिया था। जिसके बाद जे जयललिता को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ गई, जस्टिस घोष और जस्टिस अमिताभ की बेंच ने उन्हें आय से अधिक प्रॉपर्टी खरीदने के लिए जनता का पैसा इस्तेमाल करने का दोषी ठहराया था।

देश को पहला लोकपाल मिलने पर समाजसेवी अन्ना हजारे ने सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने कहा सरकार पर भारी दबाव के चलते लोकपाल का नाम सामने आया है। आंदोलन के नौ साल बाद आज जो कार्रवाई हुई है, ये देश की जनता की जीत है।

उन्होंने कहा कि इस देश की सर्वोच्च व्यवस्था जो है, वो न्याय व्यवस्था है। सुप्रीम कोर्ट के भारी दबाव के बाद ही सरकार को झुकना पड़ा है। इस कारण सरकार को लोकपाल नियुक्त करना पड़ रहा है।