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लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अपनी न्यूनतम आय योजना (न्याय योजना) की घोषणा कर दी है। कांग्रेस का कहना है कि अगर कांग्रेस केंद्र की सत्ता में आती है तो महीने में 12000 रुपए से कम आय वाले परिवारों को सालाना 72 हज़ार रुपए यानी हर महीने छह हज़ार रुपए तक की आर्थिक मदद दी जाएगी।

लोकसभा से पहले कांग्रेस की इस घोषणा को पार्टी के मास्टरस्ट्रोक के रुप में देखा जा रहा है। सत्तारूढ़ बीजेपी इस योजना का जवाब देने में जुट गई है। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस की यह घोषणा ‘चांद-तारे तोड़ लाने’ के वादे जैसी है, जो ज़मीनी स्तर पर मुमकिन नहीं है। बीजेपी ने कांग्रेस के इस वादे को देश की जनता के साथ धोखा बताया है।

बीजेपी के साथ ही ‘गोदी मीडिया’ के पत्रकार भी कांग्रेस की इस योजना पर आपत्ति जताते नज़र आ रहे हैं। गोदी मीडिया के पत्रकारों का कहना है कि कांग्रेस की यह घोषणा जनता के आत्मसम्मान के ख़िलाफ़ है।

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न्यूज़ चैनल आजतक की एंकर श्वेता सिंह (जिन्होंने नोटबंदी के दौरान जारी की गई नई नोटों में चिप लगे होने की फेक न्यूज़ चलाई थी) ने कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना पर निशाना साधते हुए ट्विटर के ज़रिए कहा, “मुफ़्त में बहुत कुछ मिलता है। पर आत्म सम्मान कभी फ़्री नहीं मिलता। राष्ट्र के लिए रोज़गार या भत्ता?”

वहीं ज़ी न्यूज़ के एंकर सुधीर चौधरी (जो जिंदल समूह से 100 करोड़ की रिश्वत के मामले में जेल काट चुके हैं) ने कांग्रेस की इस योजना पर हमला करते हुए ट्वीट किया, “1975 में आयी फ़िल्म दीवार में नायक अमिताभ बच्चन का मशहूर dialogue था- मैं आज भी फैंके हुए पैसे नहीं उठाता। तब बेरोज़गारी और ग़रीबी अपने चरम पर थी लेकिन Angry Young Man ख़ैरात नहीं लेता था। लेकिन आज के दौर में लोग नेताओं द्वारा बाँटी जा रही ख़ैरात ख़ुशी से स्वीकार कर रहें हैं”।

अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस की इस घोषणा को जनता के आत्मसम्मान के ख़िलाफ बताने वाले यह पत्रकार उस वक्त कहां थे, जब बीजेपी ने केंद्र की सत्ता में आने से पहले देश की ग़रीब जनता से वादा किया था कि उनके खाते में 15 लाख रुपए आएंगे।

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इन पत्रकारों ने बीजेपी की उन योजनाओं पर सवाल क्यों नहीं उठाए थे जिसमें ग़रीब जनता को फ्री में सेवाएं देने का वादा किया गया था। हालांकि 5 साल बीत जाने के बाद भी वह वादे अधूरे ही रहे और जनता को वादे के मुताबिक राहत नहीं मिली।

ख़ैर अत्मसम्मान की बात करने वाले इन पत्रकारों से जनता के सरोकार की ज़्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती। यह वही पत्रकार हैं, जो वोटों के ध्रुवीकरण के लिए हर शाम अपने चैनलों के माध्यम से सांप्रदायिकता की अफीम धड़ल्ले से बेचते नज़र आते हैं।

By: Asif Raza