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अंग्रेजी का एक वाक्य है जिसे लेकर सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया तक में बवाल मचा हुआ है। वो वाक्य है- Smash Brahminical Patriarchy इस वाक्य का हिंदी अनुवाद है- ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का नाश हो’

दरअसल पिछले दिनों ट्वीटर के सीईओ जैक डोर्से भारत आए हुए थें। 18 नवंबर को जैक ने कुछ भारतीय महिला पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ एक बैठक की। इस बैठक की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई और विवाद शुरू हुआ।

विवाद इसलिए शुरू हुआ क्योंकि तस्वीर में ट्विटर के सीईओ जैक डोर्से ने एक पोस्टर लिया था। पोस्टर पर लिखा था- Smash Brahminical Patriarchy यानी ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता का नाश हो’

कायदे से देखा जाए तो इस वाक्य की वजह से कोई विवाद नहीं होना चाहिए। ‘ब्राह्मणवादी’ और ‘पितृसत्ता’ इन दो शब्दों पर ज्यादा बवाल मचा हुआ है। जबकी ये दोनों ही शब्द भारतीय समाज की कड़वी सच्चाई हैं।

ब्राह्मणवाद- यानी वो शुद्धतावादी सोच जो तमाम कार्यों में खुद को सुपीरियर और दूसरों को नीच, शुद्र, अशुद्ध समझता हो। ये सोच खान पान से लेकर, दफ्तर के काम और शादी ब्याह जैसे निजी क्रिया पर हावी होता है। ब्राह्मणवाद का ब्राह्मण जाति से कोई लेना देना नहीं होता। किसी भी जाति धर्म समुदाय के लोग ब्राह्मणवादी हो सकते हैं।

लेकिन भारत में शुद्धतावादी सोच को ब्राह्मणवाद इसलिए कहते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ब्राह्मण ही वो जाति है जिसने शुद्धतावाद का कांसेप्ट गढ़ा और दूसरों को नीच, शुद्र, अशुद्ध समझने की सोच पैदा की। अब ब्राह्मणवाद अपने जनक ब्राह्मणों तक सीमित नहीं रहा। अब इस बिमारी से तमाम जाति, धर्म, समुदाय के लोग ग्रस्त हैं।

पितृसत्ता- यानी मर्दों की सत्ता। विद्रोही कवि रामाशंकर यादव पितृसत्ता को कुछ इस तरह परिभाषित करत हैं- ‘इतिहास में पहली स्त्री हत्या उसके बेटे ने अपने बाप के कहने पर की। जमदग्नि ने कहा कि ओ परशुराम! मैं, तुमसे कहता हूं कि अपनी मां का वध कर दो, और परशुराम ने कर दिया। इस तरह पुत्र पिता का हुआ और पितृसत्ता आई।’

ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता को बहुत पहले खत्म हो जाना चाहिए था। लेकिन भारतीय समाज के लिए बहुत ही शर्म की बात है कि आज भी इसके पक्ष में कुतर्क गढ़े जा रहे हैं। ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता को बचाने के लिए सोशल मीडिया पर मुहीम चलाई जा रही है।

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वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लगातार ब्राह्मणवाद और पितृसत्ता पर चोट करते रहते हैं। जिस पोस्टर के विरोध में मुहीम चलाई जा रही है दिलीप मंडल उस पोस्टर को अपने सोशल मीडिया प्रोफाईल की फोटो बनाने की बात लिख रहे हैं। दिलीप मंडल ने खुद भी उस पोस्ट को अपनी डीपी बनायी है और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।

वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं- अपनी डीपी, प्रोफाइल पिक्चर बदलें, ये बहुत महत्वपूर्ण है।

दोस्तों,

ट्विटर के ग्लोबल सीईओ जैक डोरसी ने जब ब्राह्मणवादी मर्दवाद को ध्वस्त करने का पोस्टर लगा ही लिया है, तो हमारा भी कर्तव्य बनता है कि इस काम में उनका समर्थन करें।

अगर हमने उनका समर्थन नहीं किया, तो दुनिया के लोगों को लगेगा कि हमें ब्राह्मणवाद से कोई दिक्कत नहीं है।

इसलिए मेरा निवेदन है और कृपया इस पर विचार कीजिए कि हम सबको अपनी DP यानी प्रोफाइल पिक्चर में वह पोस्टर कुछ दिनों के लिए लगाना चाहिए, जिसे ट्विटर के चीफ ने लगाया है।

इस काम को फेसबुक और ट्विटर पर करें। अपने दोस्तों को भी सहमत करें कि वे भी अपनी डीपी इस फोटो से बदल लें।अपना चेहरा तो हम कभी भी देख लेंगे. कुछ दिनों की बात है। डीपी बदलिए।