बलात्कार मामले में ही बलात्कार की ही धाराएं नहीं लगाई है। ऐसा सिर्फ योगीराज में ही मुमकिन है। अब इस मामले पर स्वामी चिन्मायनंद पर आरोप लगाने वाली पीड़िता ने खुद एसआईटी को कटघरे में खड़ा कर दिया है, पीड़िता का कहना है कि उसके साथ दुष्कर्म हुआ, उसने ये बात एसआईटी टीम को बताई थी मगर फिर भी चिन्मयानंद पर धारा 376 की जगह 376—सी क्यों लगाई गई है।

पीड़िता की शिकायत पर दिल्ली महिला अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी है। स्वाति ने लिखा- यूपी सरकार का नारा, हर हाल में बच जाए चिन्मयानंद हमारा! सब गन्दे काम कबूलने के बाद भी रेप चार्ज नहीं लगाया, उल्टा न्याय के लिए आत्महत्या तक करने की हालत में आई बेटी पर ही केस बना दिया! या तो कानून से डराते हैं, या उन्नाव जैसी स्थिति बनाते हैं। यही है इनका बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ!

पीड़िता ने इस मामले चिन्मायनंद को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का आरोप लगाया है. पीड़िता का कहना है कि एक बलात्कारी को गिरफ्तार करके मर्सिडीज में बैठाकर जेल भेजा गया। ऐसे में वो कैसे इंसाफ की उम्मीद करे। अब सवाल उठता है कि स्वामी चिन्मायनंद जिन्होंने करीब करीब सभी आरोपों को कुबूल कर लिया तो ऐसे में सरकार उन्हें बचाने की कोशिश क्यों कर रही है? क्या इसके पीछे स्वामी का संघी होना उन्हें फायदा पहुंचा रहा है।

चिन्मयानंद ने कबूला कि लड़कियों से गंदे काम करवाता था फिर भी योगी ने रेप केस लिया वापस, धिक्कार है

गौरतलब हो कि चिन्मायनंद पर 376C, 354D,342,506 की हैं, इसी पर आरोप है कि चिन्मयानंद पर एसआईटी ने हल्की धाराएं लगाकर केस को कमजोर करने की कोशिश की है। पीड़िता का कहना है कि एक बलात्कारी को गिरफ्तार करके मर्सिडीज में बैठाकर जेल भेजा गया। ऐसे में वो कैसे इंसाफ की उम्मीद करे।

बता दें कि 376—सी के अलावा चिन्मयानंद पर धारा 354-डी, 342, 506 भी लगाई गई हैं। किसी महिला का पीछा करने के मामले में 354—डी, सदोष किसी महिला को रोकने के लिए 342 और आपराधिक धमकी देने के मामले में 506 में लगाई जाती है।